Yahoo! Search
Sign In New User? Sign Up

ALLAHABAD

Hindi (हिन्दी)

Explore the Hindi online world -news, blogs, podcasts and a lot more in Hindi

Hindi News

Hindi Blogs

ओ प्रवासी

Oct 7 5:34 AM

ओ प्रवासी उग रहे आकार अम्बर में मरुस्थल के भ्रमों से कल्पना की हर छुअन, पर हो गई रह कर हवा सी कब तलक यों पीर की अंगनाईयों में कसमसाता दूर हो परिवेश से अपने रहेगा ? ओ प्रवासी ज़िन्दगी की इस चकई का खींचता है कौन धागा कौन दे सन्देस छत पर भेजता है रोज कागा कौन सी कठपुतलियों के हाथ की रेखा बना है उलझनों में और उलझा जा रहा है मन अभागा साध उलझे केश सी प...

कानून और व्यवस्था केवल पुलिस का मसला नहीं

Oct 7 5:30 AM

"कानून और व्यवस्था", ये दो शब्द बहुत सुनने को मिलेंगे,  हिन्दी में कम और अंग्रेजी में अधिक "लॉ एण्ड ऑर्डर"। आखिर क्या अर्थ है इन का? जब भी कहीं जनता का कोई समूह, छोटा या बड़ा उद्वेलित हो कर प्रत्यक्ष रूप से किसी अपराधिक गतिविधि में संलग्न हो जाता है तब कहा जाता है कि कानून और व्यवस्था बिगड़ रही है। मसलन किसी बाजार में सर...

इंसानियत क्या धर्म देख कर जागती है?

Oct 7 5:30 AM

ईशर ने सबको इंसान बना कर पैदा किया. वह किसी इंसान में अन्तर नहीं करता. वह सब से प्रेम करता है. प्रेम उस का एक रूप है. पर हमने उसे बाँट दिया. हमने इंसानों को बाँट दिया. अलग-अलग धर्म बना दिए. हर धर्म का एक ईश्वर तय कर दिया. ठीक है. मैं इस में कोई बुराई नहीं देखता, पर बुरा हुआ तब जब हम धर्म और ईश्वर के नाम पर लड़ने लगे, मेरा ईश्वर सही है, मेरा ईश्वर सब...

यहूदीवाढ के फ़ॉल त्यौहार

Oct 7 5:24 AM

अपनी पिछली ब्लॉग ऐंट्री में मैंने लिखा कि मैं यहूदीवाढ के फ़ॉल त्यौहार के बारे में समझाऊँ | मैं यहाँ कोशीश करूंगी | यहूदीवाढ के चार फ़ॉल त्यौहार 'रोश हशाना', 'योम किप्पुर', 'सिम्ख़्हात टोरह', और 'सूकोट' हैं | यहूदीवाढ का 'कैलेंडर' चंद्र है | दिन संध्या को शुरू करते हैं | सेप्टेम्बर २९ की रात से लेकर सेप्टेम्बर ३...

लोरिकायन - लाईट एण्ड साउंड (जुगुर-जागर रपट) : संजीव तिवारी

Oct 7 5:17 AM

27 सितम्बसर के दिन छत्तीसगढ के लोक दरसन ला जगर-मगर चमकावत क्षितिज रंग सिबिर के लाईट एण्ड साउंड के जोरदरहा परसतुती ‘लोरिकायन’ हा दुरूग मा जब होईस त बईगा पारा के मिनी स्टेडियम म छत्तीसगढ के मनखे मन के खलक उजर गे, घमघम ले माई पिल्ला सकला गे अउ हमर लोक गाथा – लोरिक चंदा के मंच परसतुति ‘लोरिकायन’ मा अपन तइहा, गांव-गंवई, अपन महर-महर करत लोकगीत के परमपरा ...

सद्विचारों के लिए यंहा आयें!

Oct 7 5:07 AM

तलवार ही सब कुछ है , उसके बिना न मनुष्य अपनी रक्षा कर सकता है और न निर्बल की। गुरु गोविंद सिंह इसी प्रकार के विचारों के लिए इस चिट्ठे पर पधारें सद - विचार...

सद्विचारों के लिए यंहा आयें!

Oct 7 5:05 AM

तलवार ही सब कुछ है , उसके बिना न मनुष्य अपनी रक्षा कर सकता है और न निर्बल की। गुरु गोविंद सिंह इसी प्रकार के विचारों के लिए इस चिट्ठे पर पधारें सद - विचार...

अब अगले जन्म में लिखूंगा - नीरज [पद्मश्री गोपालदास नीरज का साक्षात्कार] – देवेश वशिष्ठ ‘खबरी’

Oct 7 5:00 AM

नीरज जी, कुछ लोगों ने आपको हिंदी का अश्वघोष कहा,दिनकर ने हिंदी की वीणा कहा। भाषाभाषियों ने संत कवि माना तो कुछ ने आपको मृत्युवादी-निराशावादी माना। स्वयं को कैसे परिभाषित करते हैं आप?  देखिए, मैं तो शुद्ध कविता लिखता हूं। शुद्ध कविता में जीवन के बहुत से आयाम आते हैं। कहीं आशा है तो वहीं निराशा भी है, जीवन है तो मृत्यु भी है, कहीं जय है तो कहीं पराजय...

फिर एक साँझ घिर आयी है.

Oct 7 4:58 AM

फिर एक साँझ घिर आयी है। फिर तुम्हारी याद आयी है। फिर तुम्हारे स्नेहिल स्पर्श की याद आयी है। तन मन प्रेम रस से भिगो लाई है। फिर तुम्हारी याद आयी है। फिर एक साँझ घिर आयी है। फिर तुम्हारी याद आयी है। न्यनों में न थमने वाली बरखा घिर आयी है। फिर तुम्हारी याद आयी है। रोते हुए होठों पे हंसी आयी है, जब तुम्हारी सूरत झरोखे से नजर आयी है। फिर तुम्हारी याद आय...

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात- बेगम अख़्तर

Oct 7 4:56 AM

आइये सुनें बेगम अख़्तर द्वारा गाई सुदर्शन फ़ाकि़र की ये मशहूर ग़ज़ल- इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया वरना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया आप कहते हैं कि रोने से न बदलेंगे नसीब उम्र भर आप की इस बात ने रोने न दिया रोने वालों से कहो उनका भी रोना रो लें जिनको मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया तुझसे मिल कर हमें रोना था बहुत रोना था तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ा...

ओ प्रवासी

Oct 7 5:34 AM

ओ प्रवासी उग रहे आकार अम्बर में मरुस्थल के भ्रमों से कल्पना की हर छुअन, पर हो गई रह कर हवा सी कब तलक यों पीर की अंगनाईयों में कसमसाता दूर हो परिवेश से अपने रहेगा ? ओ प्रवासी ज़िन्दगी की इस चकई का खींचता है कौन धागा कौन दे सन्देस छत पर भेजता है रोज कागा कौन सी कठपुतलियों के हाथ की रेखा बना है उलझनों में और उलझा जा रहा है मन अभागा साध उलझे केश सी प...

कानून और व्यवस्था केवल पुलिस का मसला नहीं

Oct 7 5:30 AM

"कानून और व्यवस्था", ये दो शब्द बहुत सुनने को मिलेंगे,  हिन्दी में कम और अंग्रेजी में अधिक "लॉ एण्ड ऑर्डर"। आखिर क्या अर्थ है इन का? जब भी कहीं जनता का कोई समूह, छोटा या बड़ा उद्वेलित हो कर प्रत्यक्ष रूप से किसी अपराधिक गतिविधि में संलग्न हो जाता है तब कहा जाता है कि कानून और व्यवस्था बिगड़ रही है। मसलन किसी बाजार में सर...

इंसानियत क्या धर्म देख कर जागती है?

Oct 7 5:30 AM

ईशर ने सबको इंसान बना कर पैदा किया. वह किसी इंसान में अन्तर नहीं करता. वह सब से प्रेम करता है. प्रेम उस का एक रूप है. पर हमने उसे बाँट दिया. हमने इंसानों को बाँट दिया. अलग-अलग धर्म बना दिए. हर धर्म का एक ईश्वर तय कर दिया. ठीक है. मैं इस में कोई बुराई नहीं देखता, पर बुरा हुआ तब जब हम धर्म और ईश्वर के नाम पर लड़ने लगे, मेरा ईश्वर सही है, मेरा ईश्वर सब...

यहूदीवाढ के फ़ॉल त्यौहार

Oct 7 5:24 AM

अपनी पिछली ब्लॉग ऐंट्री में मैंने लिखा कि मैं यहूदीवाढ के फ़ॉल त्यौहार के बारे में समझाऊँ | मैं यहाँ कोशीश करूंगी | यहूदीवाढ के चार फ़ॉल त्यौहार 'रोश हशाना', 'योम किप्पुर', 'सिम्ख़्हात टोरह', और 'सूकोट' हैं | यहूदीवाढ का 'कैलेंडर' चंद्र है | दिन संध्या को शुरू करते हैं | सेप्टेम्बर २९ की रात से लेकर सेप्टेम्बर ३...

लोरिकायन - लाईट एण्ड साउंड (जुगुर-जागर रपट) : संजीव तिवारी

Oct 7 5:17 AM

27 सितम्बसर के दिन छत्तीसगढ के लोक दरसन ला जगर-मगर चमकावत क्षितिज रंग सिबिर के लाईट एण्ड साउंड के जोरदरहा परसतुती ‘लोरिकायन’ हा दुरूग मा जब होईस त बईगा पारा के मिनी स्टेडियम म छत्तीसगढ के मनखे मन के खलक उजर गे, घमघम ले माई पिल्ला सकला गे अउ हमर लोक गाथा – लोरिक चंदा के मंच परसतुति ‘लोरिकायन’ मा अपन तइहा, गांव-गंवई, अपन महर-महर करत लोकगीत के परमपरा ...

सद्विचारों के लिए यंहा आयें!

Oct 7 5:07 AM

तलवार ही सब कुछ है , उसके बिना न मनुष्य अपनी रक्षा कर सकता है और न निर्बल की। गुरु गोविंद सिंह इसी प्रकार के विचारों के लिए इस चिट्ठे पर पधारें सद - विचार...

सद्विचारों के लिए यंहा आयें!

Oct 7 5:05 AM

तलवार ही सब कुछ है , उसके बिना न मनुष्य अपनी रक्षा कर सकता है और न निर्बल की। गुरु गोविंद सिंह इसी प्रकार के विचारों के लिए इस चिट्ठे पर पधारें सद - विचार...

अब अगले जन्म में लिखूंगा - नीरज [पद्मश्री गोपालदास नीरज का साक्षात्कार] – देवेश वशिष्ठ ‘खबरी’

Oct 7 5:00 AM

नीरज जी, कुछ लोगों ने आपको हिंदी का अश्वघोष कहा,दिनकर ने हिंदी की वीणा कहा। भाषाभाषियों ने संत कवि माना तो कुछ ने आपको मृत्युवादी-निराशावादी माना। स्वयं को कैसे परिभाषित करते हैं आप?  देखिए, मैं तो शुद्ध कविता लिखता हूं। शुद्ध कविता में जीवन के बहुत से आयाम आते हैं। कहीं आशा है तो वहीं निराशा भी है, जीवन है तो मृत्यु भी है, कहीं जय है तो कहीं पराजय...

फिर एक साँझ घिर आयी है.

Oct 7 4:58 AM

फिर एक साँझ घिर आयी है। फिर तुम्हारी याद आयी है। फिर तुम्हारे स्नेहिल स्पर्श की याद आयी है। तन मन प्रेम रस से भिगो लाई है। फिर तुम्हारी याद आयी है। फिर एक साँझ घिर आयी है। फिर तुम्हारी याद आयी है। न्यनों में न थमने वाली बरखा घिर आयी है। फिर तुम्हारी याद आयी है। रोते हुए होठों पे हंसी आयी है, जब तुम्हारी सूरत झरोखे से नजर आयी है। फिर तुम्हारी याद आय...

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात- बेगम अख़्तर

Oct 7 4:56 AM

आइये सुनें बेगम अख़्तर द्वारा गाई सुदर्शन फ़ाकि़र की ये मशहूर ग़ज़ल- इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया वरना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया आप कहते हैं कि रोने से न बदलेंगे नसीब उम्र भर आप की इस बात ने रोने न दिया रोने वालों से कहो उनका भी रोना रो लें जिनको मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया तुझसे मिल कर हमें रोना था बहुत रोना था तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ा...

पहाड़ों से पलायन का दर्द

May 31 8:58 AM

नीरज जोशी पहाड़ से लौट कर आये हैं और अपना दर्द विस्फोट पर सबसे बांट रहे हैं. गांव के ईर्द गिर्द सिरहाने और पांवों की ओर दो तीन किमी दूर तक छितरे उन सीढ़ीनुमा खेतों के बारे में इस बार अचानक मेरी दिलचस्पी बढ गई। खेतों को दूर दूर तक निहारते हुए यह प्रश्न मेरे जेहन में बार-बार कौंधा कि आखिर इस महाविस्तार में इतने सीढीनुमा खेत किसने बनाये होंगे? अब ये ख...

अनुपम तालाब साधना

May 8 5:49 AM

संजय तिवारी उदारीकरण और पर्यावरण के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं.हाल ही मैं उन्होने विस्फोट पत्रिका को प्रारम्भ किया है. उसी में वह पर्यावरणविद अनुपम मिश्रा जी के बारे में बता रहे हैं. वे लोकजीवन और लोकज्ञान के साधक हैं. अब न लोकजीवन की कोई परिधि या सीमा है और न ही लोकज्ञान की. इसलिए अनुपम मिश्र भी किसी सीमा या परिचय से बंधें हुए नहीं हैं. ...

डब्बाबंद मुल्क में बड़ी होती लड़की..

Feb 29 11:06 AM

मनीषा इस पितृसत्तात्मक मुल्क में यौवन की दहलीज पर कदम रखती लड़की का शब्द चित्र खींच रही हैं.   अच्‍छे घरों की अच्‍छी लड़कियाँ विले पार्ले स्‍टेशन पर उतरते ही अच्‍छी लड़की का चोंगा सीढि़यों के नीचे छिपा कॉलेज और समंदर के सिम्‍त जाने वाली सड़क का रुख करतीं और शाम को घर लौटते हुए सीढि़यों के नीचे से चोंगा उठाती जाती...

क्या स्त्री का भविष्य अन्धकार-मय है?

Feb 24 7:06 AM

ईस्वामी पिछ्ले एक दशक से अमरीका में रह रहे हैं. वहां के समाज को वह नजदीक से देखते आये हैं और उसको लेकर उनका एक नजरिया भी है. अमरीका के नारीवादी अन्दोलन के खतरों के प्रति सतर्क करते हुए वह भारत की स्त्रीयों को अमरीकी आन्दोलन का अन्धानुकरण न करने की सलाह दे रहे हैं.     भारतीय स्त्रियों ने अपने लिये सोचने का ठेका पश्चिमी नारियों को दे द...

पुरी की यात्रा के अनुभव व धर्म

Feb 22 3:23 PM

सुनील दीपक अभी अभी भारत यात्रा से लौटे हैं.पुरी (उड़ीसा) में जगन्नाथ मंदिर की यात्रा करते समय कुछ बातें उनके मन में आयी जिन्हे वह हमारे साथ बांट रहे हैं.   वैसे व्यक्तिगत रूप में मेरे लिए धार्मिकता और मंदिर में जा कर पूजा करने में कोई विषेश सम्बंध नहीं क्योंकि मेरे लिए धार्मिकता अधिक आध्यात्मिक एवं अंतर्मुखी है. धर्म और आस्था पर बात करना मुझे...

काग़ज़ की कश्‍ती डूब गयी…

Feb 21 10:45 AM

"ये काग़ज़ की कश्‍ती वो बारिश का पानी’ लिखने वाले सुदर्शन फ़ाकिर नहीं रहे…उन्ही को श्रद्धांजली देते हुए युनुस उनकी कुछ चुनिदा नज्मों से परिचय करवा रहे हैं. सुदर्शन फाकिर जिंदगी भर गुमनाम रहे, वो उन शायरों में से नहीं थे जो टेलीविजन या रेडियो की दुनिया में छाए रहें।वो ज्‍यादा इंटरव्‍यू भी नहीं देते थे । ये विडंबन...

दिहाड़ी मजदूर

Feb 21 9:55 AM

ज्ञानदत्त पाण्डेयजी नियमित लिखने वाले हैं। उनका ब्लाग उनकी मानसिक हलचल का आईना है। वे जहां कहीं जाते हैं , उनका कैमरा उनके साथ होता है। कल ‘डिटूर’ पर निकले तो दिहाड़ी मजूर दिखे। आप भी उनकी नजर से देखिये - जहां ये लोग इकठ्ठा होते हैं, वहां रेल की संकरी पुलिया है। सड़क भी ऊबड़ खाबड़ है। लिहाजा वाहन धीरे धीरे निकलता है वहां से। सड़क के दोनो ...

क्या मैं पतित होना नहीं चाहती ?

Feb 20 7:56 PM

प्रत्यक्षा का आत्मालाप कमोबेश हर एक स्त्री और पुरुष का आत्मालाप हो सकता है.जरूरत है तो इसे अपने अंदर कुरेदने की. मैं प्रगतिशील कहलाने के लिये पश्चिमी कपड़े पहनूँ , गाड़ी चलाऊँ , सिगरेट शराब पियूँ , देर रात आवारागर्दी करूँ ऐसे स्टीरियोटाइप में नहीं फँसना चाहती । मैं ये सिर्फ तब ही करना चाहूँगी जब ये करना मेरी मर्जी में होगा , सिर्फ किसी और के बनाये ...

आम बजट की खास खास बातें

Feb 20 5:11 PM

देश का बजट एक सालाना कार्यक्रम है इसी के बारे में अपने व्यंग्यात्मक लहज़े में शिवकुमार मिश्र पूरा का पूरा निबेंध छाप दे रहे हैं. उनका यह निबंध भारतीय आम बजट की खास खास बातों से परिचय कराता है. बजट प्रस्तुति के बाद पुतले जलाने, रास्ता रोकने और बंद करने के कार्यक्रमों के अलावा एक और कार्यक्रम होता है जिसे बजट के ‘टीवीय विमर्श’ के नाम से ...

पतनशील बनाम प्रगतिशील

Feb 19 10:43 AM

चन्द्रभूषण या यानि चन्दू भाई हमेशा से ज्वलंत मुद्दों पर अपनी लेखनी चलाते रहे हैं. अब वह पतनशील और प्रगतिशील को अपने निजी अनुभव से तोल रहे हैं. जमूरे की तरह उछल-उछलकर बात-बात पर बोलने की मेरी आदत नहीं है, न ही किसी बहस में इसलिए शामिल होता हूं कि लाला लोग इस जगह पड़ी टीपें गिनें ताकि देर-सबेर दो पैसे का जुगाड़ हो। मेरे लिए कोई भी शब्द सिर्फ बौद्धि...

आजादी के नाम पर...

Aug 14 12:01 PM

सभी आजाद रहना चाहते हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि आजादी की सबकी परिभाषा अलग-अलग है। संभव है कि जहां से किसी की आजादी शुरू होती हो, वहां किसी के लिए इसका अंत हो रहा हो, लेकिन हम इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। हमने इतने स्वतंत्रता दिवस मना लिए, लेकिन सच यही है कि ज्यादातर लोग आज भी आजादी को गलत अर्थों में ही ले रहे हैं: जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई ल...

महिमा सफेद हाथियों की!

May 12 3:00 PM

जमाना सफेद हाथियों का है। हमरे खयाल इस निराली दुनिया के ऊ सबसे नायाब जीव हैं औरो महिमा ऐसन देखिए कि देश में आजकल ऊ काले हाथियों से बेसी पाए जाते हैं। काले हाथी भले लुप्तप्राय हो रहे हों, लेकिन सफेद हाथियों की हस्ती मिटाए नहीं मिटती। अपने देश में तो हालत कुछ ऐसन है कि कंपनियां पहिले सफेद हाथियों को नौकरी पर रखती है औरो फिर उन घोड़ों के बारे में सोचत...

बहुते जालिम है दुनिया

May 3 2:00 PM

दुनिया बहुते जालिम है। आप कुछो नहीं कीजिए, तो उसको पिराबलम, कुछो करने लगिए, तभियो पिराबलम! आखिर दुनिया को चाहिए का, कोयो नहीं जानता। औरो जब तक जानने की स्थिति में होता है, बरबाद हो चुका होता है। जब तक आम भारतीयों को दोनों टैम रोटी-नून नहीं मिलता था, गरीब देश कह-कहके पश्चिमी देशों ने उसके नाक में दम कर रख था। अब जाके स्थिति सुधरी औरो कुछ लोग भरपेट ख...

काश! हम सठियाये होते

Apr 26 3:29 PM

पहले हम बुढ़ापे से डरते थे, लेकिन अब बूढे़ होने को बेकरार हूं। दिल करता है, कल के बजाए आज बूढ़ा हो जाऊं, तो एक अदद ढंग की हसीना हमको भी मिल जाए। नहीं, हम बेवकूफ नहीं हूं। बूढ़ा हम इसलिए होना चाहता हूं, काहे कि बुढ़ापा अब बुढ़ापा रह नहीं गया है। जीवन के चौथेपन में अब एतना मौज आने लगी है कि वानप्रस्थ की बात अब किसी के दिमागे में नहीं घुसती। विश्वास न...

किरकेटिया कनफूजन

Apr 5 3:00 PM

शाहरुख खान औरो अक्षय कुमार आजकल फिलिम से बेसी किरकेट में घुसकर चरचा बटोर रहे हैं। शाहरुख के हाथ में गेंद औरो अक्षय के हाथ में बल्ला... लोग कनफूजिया रहे हैं- कल तक तो पर्दे पर महाशय नचनिया बने घूम रहे थे, किरकेटर कब बन गए? अभी तक किसी टीम में खेलते तो नहीं देखा...। लोग हैरान हैं, तो किरकेटो कम हैरान नहीं है। ऊ ई तो जानता है कि आजकल दुनिया में कोयो अ...

स्वर्ग जाना के चाहता है?

Apr 2 6:00 PM

छठे वेतन आयोग की सिफारिश आने से बाबू सब कुछ बेसिए खुश हो गए हैं। बड़का-बड़का झोला सिलाकर अब उनको इंतजार है, तो बस सरकार के वेतन आयोग की सिफारिश मान लेने का। हालांकि हमरे समझ में ई नहीं आ रहा कि जब जिंदगी का फटफटिया घूस वाले पेटरोल से मजा में चलिए रहा है, तो एतना सैलरी का ऊ करेंगे का? एक ठो बाबू मिल गए, 'हमने अपनी इस 'चिंता' से उनको अवगत...

हाकी की लुटिया

Mar 15 3:02 PM

हाकी की लुटिया डूब गई, लोग बहुते निराश हुए। पूरे देश में बस एके ठो आदमी है, जो तनियो ठो परेशान नहीं हुआ औरो ऊ हैं हाकी महासंघ के अध्यक्ष गिल साहब। हमने सोचा, चलो मातम की इस बेला में गिल साहब से हाकी के बारे में बतिया लिया जाए। हम पहुंचे गिल साहब के पास। हमने कहा, 'बधाई हो, आपने ऊ कर दिखाया, जो 80 साल में कोयो नहीं कर सका था?' ऊ बोले, 'ध...

Source : आईना

एक क्लिक से हिन्दी टाईपिंग - कैसे काम करता है

Oct 3 5:56 PM

  हमने आपको बताया था कि कैसे अब आप पिटारा टूलबार पर एक क्लिक से हिंदी टाईपिंग कर सकते हैं। आज आपको दिखाते हैं कि यह कैसे काम करता है।   इस वीडियो में देखिये कि आप कैसे इस टूल के द्वारा एक क्लिक से कितनी आसानी से हिंदी में सर्च कर सकते हैं ।         ...

एक क्लिक से हिंदी टाईपिंग

Sep 29 6:47 PM

हिंदी में टाईप करने के लिये अब पिटारा पर हम लाये हैं बहुत ही आसान एक तरीका।  बस एक क्लिक करें और हिंदी में टाईप करना शुरू कर दें। न कोई अलग से सॉफ्टवेयर चलाने की जरूरत और न ही कहीं और टाईप करके कट कॉपी पेस्ट करने का झंझट। बस पिटारा पर “हिंदी टाईप करें” बटन पर क्लिक करें और किसी भी साईट पर हिंदी लिखना शुरू कर दें। अब आप किसी भी साईट पर आ...

पिटारा हिंदी टूलबार का नया रूप

Sep 17 12:29 PM

पिटारा हिंदी टूलबार को एक नया रूप दिया गया है। सारी सुविधायें वही हैं, मगर रंग रूप थोड़ा बदल गया है। जो लोग इसे टूलबार को नियमित प्रयोग करते हैं, उन्होने इस बदलाव को देख ही लिया होगा। आपको यह बदलाव कैसे लगे हमें अवश्य बतायें। (बड़ा आकार देखने के लिये इमेज पर क्लिक करें) पिटारा टूलबार यहां  से डाउनलोड करें...

खुश भैया और डेमोक्रेसी का ‘अमर’ जुगाड़

Aug 2 6:15 PM

“नमस्कार बड़े भैया, मैं डेमोक्रेसी का ‘अमर’ जुगाड़।”   “व्हाट जुगाड़?”   “जुगाड़ माने यदि सरकार अल्पमत में आ जाये तो हम अतिरिक्त साँसदों का जुगाड़ करवा देते हैं। यदि आपको भी कभी ट्रस्ट वोट के लिये साँसदो का जुगाड़ करना हो तो बतायें। एस पी तो क्या बीएसपी से भी जुगाड़ करवा देंगे।”   “नो नो थैंक्यू, वी डोंट आऊटसोर्स आवर डे...

एक शहर

May 29 8:13 PM

एक शहर - अमृता प्रीतम   1. अस्पताल के दरवाजे पर हक, सच, ईमान और कद्रें, जाने कितने ही लफ्ज़ बीमार पड़े हैं इक भीड़ सी इकट्ठी हो गयी है,   जाने कौन नुस्खा लिखेगा जाने यह नुस्खा लग जायेगा, लेकिन अभी तो ऐसा लगता है इनके दिन पूरे हो गये… 2. इस शहर में एक घर घर कि जहां बेघर रहते हैं जिस दिन कोई मजदूरी नहीं मिलत...

अब ट्विटर पर सीधे संदेश भेजें अपने पिटारा टूलबार से

May 28 9:12 AM

ट्विटर बहुत ही तेजी से इंटरनेट पर लोकप्रिय हो रही माइक्रोब्लॉगिंग नेटवर्किंग सेवा है। इसके द्वारा आप लगातार हर समय  अपनो मित्रों के संदेश प्राप्त भी कर सकते हैं और अपने संदेश भेज भी सकते हैं। ट्विटर के बारे में ज्यादा जानकारी आप आलोक जी के इस लेख से ले सकते हैं। यदि आपका ट्विटर पर खाता नहीं है तो आज ही बनायें और स्वंय ट्विटर की साइट पर जाकर इस...

ज्ञानवर्धक रहा दिल्ली ब्लॉगकैंप

May 25 5:16 PM

दिल्ली में ब्लॉगकैंप की घोषणा जब अमित   ने की तो उसी समय मन बना लिया था कि इस ब्लॉगकैंप में जरूर जाऊंगा। मगर शनिवार सुबह एक जरूरी मीटिंग निकल आयी। मीटिंग लम्बी हो रही थी और मेरा मन नैहरू प्लेस में माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस में चल रही ब्लॉगकैंप पर ही अटका था। किसी तरह मीटिंग समाप्त कर निकला तो ट्विटर पर अमित का संदेश था कि Blogging beyond English ...

मनुष्य खत्म हो रहे हैं, वस्तुयें खिली हुई हैं (१)- अखिलेश

Oct 5 6:11 PM

[सुपरिचित कथाकार अखिलेश का नाम हिंदी कथा पाठकों के लिये जाना-पहचाना नाम है। उनकी कहानी चिट्ठी में देश के तमाम पढ़े-लिखे युवा अपने को या अपने परिवेश को किसी न किसी न रूप में मौजूद पाते हैं। अखिलेश का एक आत्मक्थ्य नुमा लेख मेरे पसंदीदा लेखों में हैं। प्रख्यात साहित्यिक कथापत्रिका, ‘कथादेश’, के फरवरी [...]...

बोरियत जो न कराये

Oct 2 6:09 AM

दफ़्तर में हमारे एक सहकर्मी हैं। एक ही दफ़्तर में होने के बावजूद वे हमारे मित्र हैं। बगल के कमरे में ही बैठते हैं इसलिये बहुत दिन से उनसे ’बातचीत’ नहीं हो पायी। आते-जाते कभी ’बात’ हुयी तो ’चीत’ रह गयी। ’चीत’ हुई तो ’बात’के लिये मौका नहीं मिला। आज सोचा उनके दफ़्तर में ही चल [...]...

ब्लागिंग मस्ती की पाठशाला है -आलोक पुराणिक

Sep 29 11:02 PM

आलोक पुराणिक [आलोक पुराणिक हिंदी व्यंग्य के जाने माने युवा लेखक थे। थे इसलिये क्योंकि पिछले दो साल से ब्लागर भी हो लिये हैं। गत दस-बारह वर्षों से व्यंग्य लेखन में सक्रिय आलोक पुराणिक से जब व्यंग्य लेखन के पहले के कामकाज के बारे में पूछा गया तो जवाब मिला-'इससे पहले जो करते थे,उसे बताने [...]...

काम छोड़ो-महान बनो

Sep 27 7:18 AM

दुनिया में महान की मरने के बाद बड़ी कदर होती है। जहां कोई लफ़ड़ा हुआ आवाजें उठती है- आज देश को गांधी की बहुत जरूरत है, एक भगतसिंह चाहिये, पटेल होते तो देश को ये हाल न देखने पड़ते, शास्त्रीजी ने नैतिकता के तहत इस्तीफ़ा दे दिया था। कोई तो कोई तो और एंटीक महापुरुष चाहता [...]...

चुपाय रहव दुलहिन मारा जाई कउवा

Sep 26 7:20 AM

बहुत दिन पहले पढ़े एक गीत की लाइने काफ़ी दिन से याद आ रही हैं- चुपाय रहव दुलहिन मारा जाई कउवा। पूरा गीत काफ़ी खोजा लेकिन अभी तक मिला नहीं। पता चला है कि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का गीत है यह। देखते हैं कब मिलता है। चुपाय रहव दुलहिन मारा जाई कउवा [...]...

शौक बड़ी घर कुलिया मां

Sep 24 7:19 AM

शौक बड़ी घर कुलिया मां जबसे ये कहावत पढ़ी मौज आ गयी। लगता है हमारे लिये ही कही गई है। दुनिया में हर अच्छी चीज को अपने लिये समझना सहज मानव स्वभाव है। इसीलिये हम इसे अपना लिये। कोई जुर्म? आज एक दोस्त से बतियाने लगे! बोले -बिटिया का एडमिशन करा दिया। हम बोले- गुड [...]...

जन्मदिन के बहाने एक पोस्ट

Sep 18 7:26 AM

दो दिन पहले हमारा ’हैप्पी बड्डे’ हुआ। तमाम दोस्तों की शुभकामनायें मिलीं। जिनकी नहीं मिल पायीं उनकी हमने जबरियन ले लीं। जब कोई ऐतराज करेंगा तब निपटा जायेगा। पिछली बार इस मौके पर हम मुम्बई में थे और ब्लाग जगत के माध्यम से जिंदगी में पहली बार अपने जन्मदिन पर केक काटते पाये गये। इस बार [...]...

Hindi Podcasts

Cool links from some of my Raw friends

Oct 5 7:02 PM

Man, there are so many fantastic things happening in the world of raw food. Here are some links to just a few of those fantastic things: Organic Young Thai Coconuts My buddy Alex from Raw Guru could...

Learn English From Home - An Excellent Online Resource To Learn And Improve Your English

Oct 5 7:02 PM

Learn English From Home - An Excellent Online Resource To Learn And Improve Your English Q. Which are the the World’s Most Widely Spoken Languages ? Well, that is a question which has many possib...

Harry potter

Oct 5 7:02 PM

Summary: New page: Harry Potter A set of stamps commissioned by Royal Mail, featuring the British children's covers of the seven books Harry Potter and the Philosopher's Stone Harry Potter and...

Podcasts

Oct 5 7:02 PM

Nag-abot kami kahapon ni Larry sa faculty lounge ng caf at nagkakuwentuhan hanggang sa paglalakad pabalik sa Dela Costa. Tungkol sa Ateneo workshop (at ang mga "exciting" na kombinasyon ng p...

Sikhism, A View of the Sikh Religion

Oct 5 7:02 PM

Sikhism, A View of the Sikh Religion September 25th, 2008 by keahnsblog1992 At the northwestern tip of India is located The Golden Temple, or Harimandir Sahib, the most significant historical center...

Hindi Bookmarks

Send in your comments/feedback about Our City | Report copyright violations if any

Yahoo! Our City may have links to certain applications like flickr, Yahoo! Video, Upcoming, del.icio.us etc., which are U.S. products governed by U.S. laws. By accessing or using any of these applications, you agree to the Yahoo! U.S. Terms of Service and Privacy Policy, which are subject to U.S.A. laws.

Copyright 2007 Yahoo Web Services India Pvt Ltd. All rights reserved.
Privacy Policy - Terms of Service - Copyright Notice