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पुलिस का उपयोग देश की अन्दरूनी जन-रक्षा हेतु उसी तरह किया जाता है जिस प्रकार किसी भी देश में सेना का उपयोग अन्य देशों की अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिये किया जाता है। भारत में गृहरक्षा विभाग के अन्तर्गत आने वाला यह विभाग, देश की कानून व्यवस्था को संभालने का काम करता है। अपराधिक गतिविधियों को रोकने, अपराधियों को पकडने, अपराधियों के द्वारा किये जा...
कहा जाता है कि इतिहास हमें सबक सिखता है. दूसरी कहावत यह भी है कि इतिहास अपने आप को कभी नहीं दोहराता. ये दोनों ही बातें सही हैं, क्योंकि अंधे होकर इतिहास की नकल करने से, या यह इंतजार करने से कि वह अपने आप को दोहरायेगा या अचल पड़ा रहेगा, हम उससे कोई बात नहीं सीख सकते. पर हम इतिहास के पीछे झांककर और उसे हरकत देनेवाली ताक़तो को समझकर ही उससे कुछ सीख सक...
व् याख्याता और अनुवादक गोपाल प्रधान ने ' छायावादयुगीन साहित्यिक वाद - विवाद 1910-40' पर जेएनयू से पीएचडी किया है . रबीन्द्रनाथ ठाकुर , फिलॉसफ़ी ऑफ़ एजुकेशन ; आर्नल्ड हाउज़र , अ सोशल हिस्ट्री ऑफ़ आर्ट ; टॉम बॉटमोर , सोश्यॉल्जी जैसे महत्त्वपूर्ण प्रकाशनों का अनुवाद गोपालजी के खाते में दर्ज है. गोपालजी के आलेख और उनकी समीक्षाएं नियमित रूप स...
सही और ग़लत के बारे में आदमी सोचता आया है। सही और ग़लत की विभाजन रेखा के बारे में ही मतभेद लोगों में होता है। मध्यस्थ-दर्शन की रोशनी में सही और ग़लत की विभाजन रेखा की पहचान होती है। मानव-चेतना में सभी सही है। जीव-चेतना में सभी ग़लत है। मानव चेतना का मतलब है - अनुभव मूलक जीना। जीव-चेतना का मतलब है - शरीर मूलक जीना। अनुभव सम्पन्नता ही सही और ग़लत...
बेगूसराय के कारीचक-छपकी गांव निवासी मो. जैनू की पत्नी मासूमा खातून के पेट से गुरुवार को डा. शैलेन्द्र लाल के क्लीनिक में तीन घंटे के आपरेशन के बाद 22 किलो मांस का लोथड़ा (ट्यूमर) निकाला गया। तो उसे देखने लोगों की भीड़ जमा हो गयी। पीड़ित परिवार के अनुसार, मासूमा खातून पांच साल से बीमार थी। लेकिन उसे यह मालूम नहीं था कि उसके पेट के अंदर मांस का गोला प...
'दायित्वबोध' पत्रिका के सम्पादक और क्रान्तिकारी कार्यकर्ता अरविन्द सिंह की गुज़री रात गोरखपुर में मृत्यु हो गई। वह पिछले सात दिनों से बीमार चल रहे थे। बुधवार की शाम उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अचानक उनकी स्थिति बिगड़ गई। बृहस्पतिवार की रात 9:40 पर उन्होंने अन्तिम सांस ली। वे 43 बरस के थे। विद्यार्थी जीवन से ही अरविन्द सामाजिक बदल...
काफी दिनो से एक ही तरह के सवाल जवाब चल रहे हैं आजकल, मुझे लग रहा है कि बच्चे(भाई-बहन) बडे हो रहे हैं, खासकर मेरा भाई जो कि क्लास १ मे पढ रहा है, रोज आकर कोई एक विषय पर बात होती है, पूरे कहानी मे एक ही सवाल उठता है कि "अच्छा किसे कहते हैं, बूराई की परिभाषा क्या है"? उससे बात करते करते शायद मै खूद को भी समझा रही हूँ कि अच्छा क्या है बूरा क्...
शहर या तो अलग अलग क़तारों में ख़ड़ा है बंटा हुआ, या फिर उपस्थित है दौड़ता हुआ भागदौड़ क़ी परिधि पे, अपनी पूरी थकान के बाबजूद शहर को मैने कभी फुरसत में नही देखा ना हीं कभी एकजुट. बहुत बड़ी-बड़ी कतारें उपस्थित हैं बहुत छोटी-छोटी जगहों में ... <a href="http://oanum.mywebdunia.com/2008/07/25/1216985340000.html">...
डाउनलोड पॉवर आरकाइवर 11.00 Beta 2, कम्प्रेशन एवं बैकप, संस्करण इतिहास
पुलिस का उपयोग देश की अन्दरूनी जन-रक्षा हेतु उसी तरह किया जाता है जिस प्रकार किसी भी देश में सेना का उपयोग अन्य देशों की अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिये किया जाता है। भारत में गृहरक्षा विभाग के अन्तर्गत आने वाला यह विभाग, देश की कानून व्यवस्था को संभालने का काम करता है। अपराधिक गतिविधियों को रोकने, अपराधियों को पकडने, अपराधियों के द्वारा किये जा...
कहा जाता है कि इतिहास हमें सबक सिखता है. दूसरी कहावत यह भी है कि इतिहास अपने आप को कभी नहीं दोहराता. ये दोनों ही बातें सही हैं, क्योंकि अंधे होकर इतिहास की नकल करने से, या यह इंतजार करने से कि वह अपने आप को दोहरायेगा या अचल पड़ा रहेगा, हम उससे कोई बात नहीं सीख सकते. पर हम इतिहास के पीछे झांककर और उसे हरकत देनेवाली ताक़तो को समझकर ही उससे कुछ सीख सक...
व् याख्याता और अनुवादक गोपाल प्रधान ने ' छायावादयुगीन साहित्यिक वाद - विवाद 1910-40' पर जेएनयू से पीएचडी किया है . रबीन्द्रनाथ ठाकुर , फिलॉसफ़ी ऑफ़ एजुकेशन ; आर्नल्ड हाउज़र , अ सोशल हिस्ट्री ऑफ़ आर्ट ; टॉम बॉटमोर , सोश्यॉल्जी जैसे महत्त्वपूर्ण प्रकाशनों का अनुवाद गोपालजी के खाते में दर्ज है. गोपालजी के आलेख और उनकी समीक्षाएं नियमित रूप स...
सही और ग़लत के बारे में आदमी सोचता आया है। सही और ग़लत की विभाजन रेखा के बारे में ही मतभेद लोगों में होता है। मध्यस्थ-दर्शन की रोशनी में सही और ग़लत की विभाजन रेखा की पहचान होती है। मानव-चेतना में सभी सही है। जीव-चेतना में सभी ग़लत है। मानव चेतना का मतलब है - अनुभव मूलक जीना। जीव-चेतना का मतलब है - शरीर मूलक जीना। अनुभव सम्पन्नता ही सही और ग़लत...
बेगूसराय के कारीचक-छपकी गांव निवासी मो. जैनू की पत्नी मासूमा खातून के पेट से गुरुवार को डा. शैलेन्द्र लाल के क्लीनिक में तीन घंटे के आपरेशन के बाद 22 किलो मांस का लोथड़ा (ट्यूमर) निकाला गया। तो उसे देखने लोगों की भीड़ जमा हो गयी। पीड़ित परिवार के अनुसार, मासूमा खातून पांच साल से बीमार थी। लेकिन उसे यह मालूम नहीं था कि उसके पेट के अंदर मांस का गोला प...
'दायित्वबोध' पत्रिका के सम्पादक और क्रान्तिकारी कार्यकर्ता अरविन्द सिंह की गुज़री रात गोरखपुर में मृत्यु हो गई। वह पिछले सात दिनों से बीमार चल रहे थे। बुधवार की शाम उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अचानक उनकी स्थिति बिगड़ गई। बृहस्पतिवार की रात 9:40 पर उन्होंने अन्तिम सांस ली। वे 43 बरस के थे। विद्यार्थी जीवन से ही अरविन्द सामाजिक बदल...
काफी दिनो से एक ही तरह के सवाल जवाब चल रहे हैं आजकल, मुझे लग रहा है कि बच्चे(भाई-बहन) बडे हो रहे हैं, खासकर मेरा भाई जो कि क्लास १ मे पढ रहा है, रोज आकर कोई एक विषय पर बात होती है, पूरे कहानी मे एक ही सवाल उठता है कि "अच्छा किसे कहते हैं, बूराई की परिभाषा क्या है"? उससे बात करते करते शायद मै खूद को भी समझा रही हूँ कि अच्छा क्या है बूरा क्...
शहर या तो अलग अलग क़तारों में ख़ड़ा है बंटा हुआ, या फिर उपस्थित है दौड़ता हुआ भागदौड़ क़ी परिधि पे, अपनी पूरी थकान के बाबजूद शहर को मैने कभी फुरसत में नही देखा ना हीं कभी एकजुट. बहुत बड़ी-बड़ी कतारें उपस्थित हैं बहुत छोटी-छोटी जगहों में ... <a href="http://oanum.mywebdunia.com/2008/07/25/1216985340000.html">...
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नीरज जोशी पहाड़ से लौट कर आये हैं और अपना दर्द विस्फोट पर सबसे बांट रहे हैं. गांव के ईर्द गिर्द सिरहाने और पांवों की ओर दो तीन किमी दूर तक छितरे उन सीढ़ीनुमा खेतों के बारे में इस बार अचानक मेरी दिलचस्पी बढ गई। खेतों को दूर दूर तक निहारते हुए यह प्रश्न मेरे जेहन में बार-बार कौंधा कि आखिर इस महाविस्तार में इतने सीढीनुमा खेत किसने बनाये होंगे? अब ये ख...
संजय तिवारी उदारीकरण और पर्यावरण के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं.हाल ही मैं उन्होने विस्फोट पत्रिका को प्रारम्भ किया है. उसी में वह पर्यावरणविद अनुपम मिश्रा जी के बारे में बता रहे हैं. वे लोकजीवन और लोकज्ञान के साधक हैं. अब न लोकजीवन की कोई परिधि या सीमा है और न ही लोकज्ञान की. इसलिए अनुपम मिश्र भी किसी सीमा या परिचय से बंधें हुए नहीं हैं. ...
मनीषा इस पितृसत्तात्मक मुल्क में यौवन की दहलीज पर कदम रखती लड़की का शब्द चित्र खींच रही हैं. अच्छे घरों की अच्छी लड़कियाँ विले पार्ले स्टेशन पर उतरते ही अच्छी लड़की का चोंगा सीढि़यों के नीचे छिपा कॉलेज और समंदर के सिम्त जाने वाली सड़क का रुख करतीं और शाम को घर लौटते हुए सीढि़यों के नीचे से चोंगा उठाती जाती...
ईस्वामी पिछ्ले एक दशक से अमरीका में रह रहे हैं. वहां के समाज को वह नजदीक से देखते आये हैं और उसको लेकर उनका एक नजरिया भी है. अमरीका के नारीवादी अन्दोलन के खतरों के प्रति सतर्क करते हुए वह भारत की स्त्रीयों को अमरीकी आन्दोलन का अन्धानुकरण न करने की सलाह दे रहे हैं. भारतीय स्त्रियों ने अपने लिये सोचने का ठेका पश्चिमी नारियों को दे द...
सुनील दीपक अभी अभी भारत यात्रा से लौटे हैं.पुरी (उड़ीसा) में जगन्नाथ मंदिर की यात्रा करते समय कुछ बातें उनके मन में आयी जिन्हे वह हमारे साथ बांट रहे हैं. वैसे व्यक्तिगत रूप में मेरे लिए धार्मिकता और मंदिर में जा कर पूजा करने में कोई विषेश सम्बंध नहीं क्योंकि मेरे लिए धार्मिकता अधिक आध्यात्मिक एवं अंतर्मुखी है. धर्म और आस्था पर बात करना मुझे...
"ये काग़ज़ की कश्ती वो बारिश का पानी’ लिखने वाले सुदर्शन फ़ाकिर नहीं रहे…उन्ही को श्रद्धांजली देते हुए युनुस उनकी कुछ चुनिदा नज्मों से परिचय करवा रहे हैं. सुदर्शन फाकिर जिंदगी भर गुमनाम रहे, वो उन शायरों में से नहीं थे जो टेलीविजन या रेडियो की दुनिया में छाए रहें।वो ज्यादा इंटरव्यू भी नहीं देते थे । ये विडंबन...
ज्ञानदत्त पाण्डेयजी नियमित लिखने वाले हैं। उनका ब्लाग उनकी मानसिक हलचल का आईना है। वे जहां कहीं जाते हैं , उनका कैमरा उनके साथ होता है। कल ‘डिटूर’ पर निकले तो दिहाड़ी मजूर दिखे। आप भी उनकी नजर से देखिये - जहां ये लोग इकठ्ठा होते हैं, वहां रेल की संकरी पुलिया है। सड़क भी ऊबड़ खाबड़ है। लिहाजा वाहन धीरे धीरे निकलता है वहां से। सड़क के दोनो ...
प्रत्यक्षा का आत्मालाप कमोबेश हर एक स्त्री और पुरुष का आत्मालाप हो सकता है.जरूरत है तो इसे अपने अंदर कुरेदने की. मैं प्रगतिशील कहलाने के लिये पश्चिमी कपड़े पहनूँ , गाड़ी चलाऊँ , सिगरेट शराब पियूँ , देर रात आवारागर्दी करूँ ऐसे स्टीरियोटाइप में नहीं फँसना चाहती । मैं ये सिर्फ तब ही करना चाहूँगी जब ये करना मेरी मर्जी में होगा , सिर्फ किसी और के बनाये ...
देश का बजट एक सालाना कार्यक्रम है इसी के बारे में अपने व्यंग्यात्मक लहज़े में शिवकुमार मिश्र पूरा का पूरा निबेंध छाप दे रहे हैं. उनका यह निबंध भारतीय आम बजट की खास खास बातों से परिचय कराता है. बजट प्रस्तुति के बाद पुतले जलाने, रास्ता रोकने और बंद करने के कार्यक्रमों के अलावा एक और कार्यक्रम होता है जिसे बजट के ‘टीवीय विमर्श’ के नाम से ...
चन्द्रभूषण या यानि चन्दू भाई हमेशा से ज्वलंत मुद्दों पर अपनी लेखनी चलाते रहे हैं. अब वह पतनशील और प्रगतिशील को अपने निजी अनुभव से तोल रहे हैं. जमूरे की तरह उछल-उछलकर बात-बात पर बोलने की मेरी आदत नहीं है, न ही किसी बहस में इसलिए शामिल होता हूं कि लाला लोग इस जगह पड़ी टीपें गिनें ताकि देर-सबेर दो पैसे का जुगाड़ हो। मेरे लिए कोई भी शब्द सिर्फ बौद्धि...
जमाना सफेद हाथियों का है। हमरे खयाल इस निराली दुनिया के ऊ सबसे नायाब जीव हैं औरो महिमा ऐसन देखिए कि देश में आजकल ऊ काले हाथियों से बेसी पाए जाते हैं। काले हाथी भले लुप्तप्राय हो रहे हों, लेकिन सफेद हाथियों की हस्ती मिटाए नहीं मिटती। अपने देश में तो हालत कुछ ऐसन है कि कंपनियां पहिले सफेद हाथियों को नौकरी पर रखती है औरो फिर उन घोड़ों के बारे में सोचत...
दुनिया बहुते जालिम है। आप कुछो नहीं कीजिए, तो उसको पिराबलम, कुछो करने लगिए, तभियो पिराबलम! आखिर दुनिया को चाहिए का, कोयो नहीं जानता। औरो जब तक जानने की स्थिति में होता है, बरबाद हो चुका होता है। जब तक आम भारतीयों को दोनों टैम रोटी-नून नहीं मिलता था, गरीब देश कह-कहके पश्चिमी देशों ने उसके नाक में दम कर रख था। अब जाके स्थिति सुधरी औरो कुछ लोग भरपेट ख...
पहले हम बुढ़ापे से डरते थे, लेकिन अब बूढे़ होने को बेकरार हूं। दिल करता है, कल के बजाए आज बूढ़ा हो जाऊं, तो एक अदद ढंग की हसीना हमको भी मिल जाए। नहीं, हम बेवकूफ नहीं हूं। बूढ़ा हम इसलिए होना चाहता हूं, काहे कि बुढ़ापा अब बुढ़ापा रह नहीं गया है। जीवन के चौथेपन में अब एतना मौज आने लगी है कि वानप्रस्थ की बात अब किसी के दिमागे में नहीं घुसती। विश्वास न...
शाहरुख खान औरो अक्षय कुमार आजकल फिलिम से बेसी किरकेट में घुसकर चरचा बटोर रहे हैं। शाहरुख के हाथ में गेंद औरो अक्षय के हाथ में बल्ला... लोग कनफूजिया रहे हैं- कल तक तो पर्दे पर महाशय नचनिया बने घूम रहे थे, किरकेटर कब बन गए? अभी तक किसी टीम में खेलते तो नहीं देखा...। लोग हैरान हैं, तो किरकेटो कम हैरान नहीं है। ऊ ई तो जानता है कि आजकल दुनिया में कोयो अ...
छठे वेतन आयोग की सिफारिश आने से बाबू सब कुछ बेसिए खुश हो गए हैं। बड़का-बड़का झोला सिलाकर अब उनको इंतजार है, तो बस सरकार के वेतन आयोग की सिफारिश मान लेने का। हालांकि हमरे समझ में ई नहीं आ रहा कि जब जिंदगी का फटफटिया घूस वाले पेटरोल से मजा में चलिए रहा है, तो एतना सैलरी का ऊ करेंगे का? एक ठो बाबू मिल गए, 'हमने अपनी इस 'चिंता' से उनको अवगत...
हाकी की लुटिया डूब गई, लोग बहुते निराश हुए। पूरे देश में बस एके ठो आदमी है, जो तनियो ठो परेशान नहीं हुआ औरो ऊ हैं हाकी महासंघ के अध्यक्ष गिल साहब। हमने सोचा, चलो मातम की इस बेला में गिल साहब से हाकी के बारे में बतिया लिया जाए। हम पहुंचे गिल साहब के पास। हमने कहा, 'बधाई हो, आपने ऊ कर दिखाया, जो 80 साल में कोयो नहीं कर सका था?' ऊ बोले, 'ध...
देश को बजट मिल गया। सत्ता में बैठे नेताजी सब खुश हैं, उनके दोनों मंतरियों ने एकदम धांसू इलेक्शन वाला बजट पेश किया है, तो विपक्षी नेताओं की परेशानी ई है कि बजट का पोस्टमार्टम कर ऊ जनता को जो उसका सड़ा-गला पार्ट दिखा रहे हैं, उसको देखकर जनता को हार्ट अटैक नहीं हो रहा। एक ठो विपक्षी नेताजी मिले, बोले, 'पब्लिक निकम्मी हो गई है। लालू ने सब्जबाग दिखा...
एक शहर - अमृता प्रीतम 1. अस्पताल के दरवाजे पर हक, सच, ईमान और कद्रें, जाने कितने ही लफ्ज़ बीमार पड़े हैं इक भीड़ सी इकट्ठी हो गयी है, जाने कौन नुस्खा लिखेगा जाने यह नुस्खा लग जायेगा, लेकिन अभी तो ऐसा लगता है इनके दिन पूरे हो गये… 2. इस शहर में एक घर घर कि जहां बेघर रहते हैं जिस दिन कोई मजदूरी नहीं मिलत...
ट्विटर बहुत ही तेजी से इंटरनेट पर लोकप्रिय हो रही माइक्रोब्लॉगिंग नेटवर्किंग सेवा है। इसके द्वारा आप लगातार हर समय अपनो मित्रों के संदेश प्राप्त भी कर सकते हैं और अपने संदेश भेज भी सकते हैं। ट्विटर के बारे में ज्यादा जानकारी आप आलोक जी के इस लेख से ले सकते हैं। यदि आपका ट्विटर पर खाता नहीं है तो आज ही बनायें और स्वंय ट्विटर की साइट पर जाकर इस...
दिल्ली में ब्लॉगकैंप की घोषणा जब अमित ने की तो उसी समय मन बना लिया था कि इस ब्लॉगकैंप में जरूर जाऊंगा। मगर शनिवार सुबह एक जरूरी मीटिंग निकल आयी। मीटिंग लम्बी हो रही थी और मेरा मन नैहरू प्लेस में माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस में चल रही ब्लॉगकैंप पर ही अटका था। किसी तरह मीटिंग समाप्त कर निकला तो ट्विटर पर अमित का संदेश था कि Blogging beyond English ...
यहां पेश है पिछले शनिवार को एनडीटीवी के कार्यक्रम ग्रेट इंडियन बाजार में मोबाइल ब्लॉगिंग पर प्रसारित एक रिपोर्ट। इसे मैंने अपने मोबाइल से ही रिकार्ड किया था इसीलिये क्लिप की क्वालिटी थोड़ा अच्छी नहीं है।...
गूगल के हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के औजार को पिटारा में जोड़ दिया गया है। आप किसी भी साइट पर हों, एक क्लिक से उसे हिंदी से अंग्रेजी अथवा अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कर सकते हैं। आपको बस टूल मीनू में अनुवाद पर क्लिक कर अपना ऑप्शन चुनना है। आपने यदि किसी अनुच्छेद (पैरा) का अनुवाद करना है तो ...
मोबाइल ब्लॉगिंग पर एक खास रिपोर्ट देखिये आज शाम 5.30 पर NDTV इंडिया के कार्यक्रम ’ग्रेट इंडियन बाजार’ में। इसकी रिकार्डिंग कल की गयी। यह एक मजेदार अनुभव रहा। कार्यक्रम रात 12.30 पर दोहराया भी जायेगा।...
भ्रष्ट हमारे हमारे देश की संसद तेली की वह घानी है जिसमे आधा तेल है आधा पानी है। धूमिल राजनीति की मंडी बड़ी नशीली है, इस मंडी ने सारी मदिरा पी है। रामेंन्द्र त्रिपाठी कल संसद में कुल जमा तीन सांसदों ने एक-एक करोड़ रुपये सदन के पटल पर पलट दिये। सदन शर्मसार हो गयी। शर्मसार किस लिये हुयी ये सबके [...]...
ब्लागिंग ब्लागिंग अजब-गजब चीज है। खटपटाया, बटन टबाया और आपका लिखा हो गया शाया। अब आप निहार रहे हैं चातक से। टिप्पणियों के इंतजार में। यह हमारा अपना सच है। हो सकता है आपक कुछ अलग सच हो भाया। ब्लाग की जो ताकत है वह बिना किसी बिचौलिये के दुनिया के सामने अपने को अभिव्यक्त करने के लिये [...]...
निरंतर कल निरंतर का ११ वां अंक प्रकाशित हुआ। यह देबाशीष का जुनून ही है कि बीमारी के बावजूद इसे निकाल दिये। ऐसा शायद पहली बार हुआ कि इस आयोजन में मेरा कोई योगदान नहीं रहा। देबू के बार-बार कहने के बावजूद कुछ लिख के दे नहीं पाया। पत्रिका आप देखिये। तमाम बेहतरीन लेख हैं। [...]...
ज्ञानजी ज्ञानजी हिंदी ब्लाग जगत मार्निंग ब्लागर हैं। इधर सूरज निकला, इधर ब्लाग चढ़ा टाइप। सूरज भी शायद उनका ब्लाग देखकर निकलता है। कहता होगा- ज्ञानजी की पोस्ट चढ़ गयी चलो निकला जाये। पढ़के टिपियाया जाये। फ़िर ड्यूटी बजायी जाये। एक दिन बेचारा इसी ज्ञानजी का ब्लाग ही देखता रह गया और देखता ही [...]...
खुशी कुछ दिन पहले आई.आई.टी. कानपुर की छात्रा तोया चटर्जी ने आत्महत्या कर् ली। पता चला कि वह् एकाध विषय में फ़ेल थी। उसका कई आई.आई.एम. में चयन हो गया था लेकिन अपने यहां कुछ विषय में वह फ़ेल थी। अवसाद को सहन न कर पाने के कारण वह पंखे से [...]...
बारिश कल बारिश में बाहर निकलना हुआ। कुछ् दिखा। उसे आपको भी दिखाता क्या, बताता हूं। १. एक मौरम से लदा एक ट्रक कीचड़ और पानी में फ़ंसा था। उसका अगला पहिया मंहगाई की तरह ऊपर उठा था, पिछला हिस्सा खरीददारी की औकात की तरह नीचे जा रहा था। ट्रक वाले ने बालू ज्यादा लाद [...]...
बारिश पानी बरसा जोर से , खड़ी हो गयी खाट, छत से पानी टपकता, घर की लग गयी वाट। घर की लग गयी वाट, झमाझम पानी बरसे, जो सूखे से थे सूखते, वे अब सूखे को तरसे। सूरज भागा जोर से, छुपा बादलों की ऒट, जैसा कोई नेता भगे, डलवा के सब वोट। पानी बरसत देखिकर, गैयन करी पुकार, चलौ बैठकी करन को, [...]...
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BIODUN IGINLA, BBC News, Minneapolis Africa Americas Asia-Pacific Europe Middle East South Asia UK Business Health Science/Nature Technology Entertainment Also in the news —————– Video and Audio...
At the northwestern tip of India is located The Golden Temple, or Harimandir Sahib, the most significant historical center on earth to the 20 million Sikhs worldwide. Here people from all walks of lif...
Although infectious disease mortality is decreasing, the disease burden remains substantial as many new infections have been identified and some well established infectious diseases have reemerged. Mi...
At the northwestern tip of India is located The Golden Temple, or Harimandir Sahib, the most significant historical center on earth to the 20 million Sikhs worldwide. Here people from all walks of lif...
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