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पत्रकार सुदामा, शिष्य सुदामा

Aug 20 8:56 AM

हम तुरंत घर पहुचे ,आखो मे ग्लीसरीन लगा उनके बडे सुपुत्र के दर्शन किये. (आखिर वो हमारे गुरू भाई थे ) "भैया ये सब कैसे हो गया ?"   रात को तो हम से बात कर रहे थे  दस बजे तक तो सेंस मे थे. उसके बाद नानसेंस हो गये ? क्या मतलब है तुम्हारा ? नही जी माफ़ कीजीये भैया जल्दी मे मुह से निकल गया, मतलब सेंस लेस हो गये. लेकिन भैया वो ...

हाल-ऐ-दिल

Aug 20 8:40 AM

"हाल-ऐ-दिल" पलकों पे आए और भिगाते चले गए, आंसू तुम्हारे फूल खिलाते चले गए.. तुमने कहा था हाल-ऐ-दिल हम बयाँ करें हम पूरी रात तुम को बताते चले गए... मुद्द्त के बाद बोझील पलकें हो जो रही, हम लोरियों से तुम को सुलाते चले गए... तुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम, तुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए.... अब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही, तुम प...

रहीम के दोहे:राम का नाम न जानने वालों का जीवन व्यर्थ

Aug 20 8:36 AM

राम नाम जान्यो नहीं, जान्यो सदा उपाधि कहि रहीम तिहिं आपुनो, जनम गंवायो वादि कविवर रहीम कहते हैं कि जिन लोगों ने नाम का नाम धारण न कर अपने धन, पद और उपाधि को ही जाना और राम के नाम पर विवाद खडे किये उनका जन्म व्यर्थ है. वह केवल वाद-विवाद कर अपना जीवन नष्ट करते हैं। राम नाम जान्यो नहीं, भइ पूजा में हानि कहि रहीम क्यों मानिहै, जम के किंकर कानि कविवर रह...

मेरे जुनूं मेरी वहशत का इम्तहान ले लो !

Aug 20 8:35 AM

अमृता के खतों के साथ साथ आप ,"" रसीदी टिकट "' के अंश भी पढ़ते रहे हैं | किसी भी प्यार , उलाहना का जिक्र एक के खतों से पूरा नही होता है | इमरोज़ भी बराबर अपनी माजा को ख़त के जवाब देते रहे | जब इमरोज़ ने अमृता के खतों का उल्लेख किया तो इमरोज़ को लगा कि खतों का भी जिक्र होना जरुरी है , ठीक वैसे ही जैसे काफ्का की महबूबा पर लिखी हु...

संत कबीर वाणी:सहजता की तराजू में सब रस तौल कर देखें

Aug 20 8:30 AM

सहज तराजू आनि के, सब रस देख तोल सब रस माहीं जीभ रस, ज कोय जानै बोल संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि इस दुनिया मेे विभिन्न प्रकार के रस है पर भी को परख लिया। इमने सबसे अधिक वजन जीभ के रस का है। जो मीठे वचन बोलता है वही इस रस का महत्व जानता है। बौलै बोल विचारि के, बैठे ठौर संभारि कहैं कबीर ता दास को, कबहू न आवै हारि संत कबीरदास जी कहते हैं कि जो सो...

तंत्र की तानाशाही के आगे लोकतंत्र की बेबसी

Aug 20 8:28 AM

विकास की नयी आर्थिक लकीर महज गांव और छोटे शहरो से महानगरों की ओर लोगों का पलायन ही नही करवा रही है बल्कि लोकतंत्र का भी पलायन हो रहा है। लोकतंत्र के पलायन का मतलब है, प्रभु वर्ग की तानाशाही। या कहें तंत्र के आगे लोकतंत्र का घुटने टेकना । यह ऐसा वातावरण बनाती है, जहां आरोपी को साबित करना होता है कि वह दोषी नहीं है। दोष लगाने वाले को कोई मशक्कत नहीं ...

Online Entertainment - Novel - Black Hole CH-14 सुझानका जाब जवाब

Aug 20 8:23 AM

Today's quote - Neither a lofty degree of intelligence nor imagination nor both together go to the making of genius. Love, love, love, that is the soul of genius. ----Wolfgang Amadeus Mozart ड्रॉईंग रुममें सुझान और पुलिस अधिकारी ब्रॅट आमने सामने बैठे थे. '' तुम्हे क्या लगता है ?'' अचानक कुछभी संदर्भ ना देते हूए ब्रॅटने स...

यार ये भाषा तुम अपने ब्लौग के लिये ही बचा कर रखा करो.

Aug 20 8:19 AM

चिट्ठाचर्चा में कुश भी जुड़ गये हैं। कल उन्होंने धांसू च फ़ांसू शुरुआत की। पंगेबाज भी जल्दी ही जलवा बिखेरने के लिये सज-धज रहे हैं। पुराने चर्चाकार भी आने के लिये मन बनायें। समीरलालजी से खासतौर से कहना है कि वे आलस्य का परित्याग करें। ब्लागजगत के बापू आशाराम बन के चिट्ठाचर्चा रोज करने का खाली-मूली उपदेश देने की बजाय कुछ नियमित मेहनत करने की सोंचे। मेह...

हिम-नद

Aug 20 8:17 AM

बरसों के गिले शिकवे आँसुओं में पिघल गये । झगड़ने को लपके थे नज़रे मिली और लिपट गये ।

बशीर बद्र की ग़ज़लें/नज़में-2

Aug 20 8:17 AM

अब किसे चाहें किसे ढूँढा करें वो भी आख़िर मिल गया अब क्या करें हल्की हल्की बारिशें होती रहें हम भी फूलों की तरह भीगा करें आँख मूँदे उस गुलाबी धूप में देर तक बैठे उसे सोचा करें दिल मुहब्बत दीन दुनिया शायरी हर दरीचे से तुझे देखा करें घर नया कपड़े नये बर्तन नये इन पुराने काग़ज़ों का क्या करें ******************************* अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल क...

आजादी के नाम पर...

Aug 14 12:01 PM

सभी आजाद रहना चाहते हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि आजादी की सबकी परिभाषा अलग-अलग है। संभव है कि जहां से किसी की आजादी शुरू होती हो, वहां किसी के लिए इसका अंत हो रहा हो, लेकिन हम इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। हमने इतने स्वतंत्रता दिवस मना लिए, लेकिन सच यही है कि ज्यादातर लोग आज भी आजादी को गलत अर्थों में ही ले रहे हैं: जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई ल...

महिमा सफेद हाथियों की!

May 12 3:00 PM

जमाना सफेद हाथियों का है। हमरे खयाल इस निराली दुनिया के ऊ सबसे नायाब जीव हैं औरो महिमा ऐसन देखिए कि देश में आजकल ऊ काले हाथियों से बेसी पाए जाते हैं। काले हाथी भले लुप्तप्राय हो रहे हों, लेकिन सफेद हाथियों की हस्ती मिटाए नहीं मिटती। अपने देश में तो हालत कुछ ऐसन है कि कंपनियां पहिले सफेद हाथियों को नौकरी पर रखती है औरो फिर उन घोड़ों के बारे में सोचत...

बहुते जालिम है दुनिया

May 3 2:00 PM

दुनिया बहुते जालिम है। आप कुछो नहीं कीजिए, तो उसको पिराबलम, कुछो करने लगिए, तभियो पिराबलम! आखिर दुनिया को चाहिए का, कोयो नहीं जानता। औरो जब तक जानने की स्थिति में होता है, बरबाद हो चुका होता है। जब तक आम भारतीयों को दोनों टैम रोटी-नून नहीं मिलता था, गरीब देश कह-कहके पश्चिमी देशों ने उसके नाक में दम कर रख था। अब जाके स्थिति सुधरी औरो कुछ लोग भरपेट ख...

काश! हम सठियाये होते

Apr 26 3:29 PM

पहले हम बुढ़ापे से डरते थे, लेकिन अब बूढे़ होने को बेकरार हूं। दिल करता है, कल के बजाए आज बूढ़ा हो जाऊं, तो एक अदद ढंग की हसीना हमको भी मिल जाए। नहीं, हम बेवकूफ नहीं हूं। बूढ़ा हम इसलिए होना चाहता हूं, काहे कि बुढ़ापा अब बुढ़ापा रह नहीं गया है। जीवन के चौथेपन में अब एतना मौज आने लगी है कि वानप्रस्थ की बात अब किसी के दिमागे में नहीं घुसती। विश्वास न...

किरकेटिया कनफूजन

Apr 5 3:00 PM

शाहरुख खान औरो अक्षय कुमार आजकल फिलिम से बेसी किरकेट में घुसकर चरचा बटोर रहे हैं। शाहरुख के हाथ में गेंद औरो अक्षय के हाथ में बल्ला... लोग कनफूजिया रहे हैं- कल तक तो पर्दे पर महाशय नचनिया बने घूम रहे थे, किरकेटर कब बन गए? अभी तक किसी टीम में खेलते तो नहीं देखा...। लोग हैरान हैं, तो किरकेटो कम हैरान नहीं है। ऊ ई तो जानता है कि आजकल दुनिया में कोयो अ...

स्वर्ग जाना के चाहता है?

Apr 2 6:00 PM

छठे वेतन आयोग की सिफारिश आने से बाबू सब कुछ बेसिए खुश हो गए हैं। बड़का-बड़का झोला सिलाकर अब उनको इंतजार है, तो बस सरकार के वेतन आयोग की सिफारिश मान लेने का। हालांकि हमरे समझ में ई नहीं आ रहा कि जब जिंदगी का फटफटिया घूस वाले पेटरोल से मजा में चलिए रहा है, तो एतना सैलरी का ऊ करेंगे का? एक ठो बाबू मिल गए, 'हमने अपनी इस 'चिंता' से उनको अवगत...

हाकी की लुटिया

Mar 15 3:02 PM

हाकी की लुटिया डूब गई, लोग बहुते निराश हुए। पूरे देश में बस एके ठो आदमी है, जो तनियो ठो परेशान नहीं हुआ औरो ऊ हैं हाकी महासंघ के अध्यक्ष गिल साहब। हमने सोचा, चलो मातम की इस बेला में गिल साहब से हाकी के बारे में बतिया लिया जाए। हम पहुंचे गिल साहब के पास। हमने कहा, 'बधाई हो, आपने ऊ कर दिखाया, जो 80 साल में कोयो नहीं कर सका था?' ऊ बोले, 'ध...

नेताजी का बजट

Mar 1 3:00 PM

देश को बजट मिल गया। सत्ता में बैठे नेताजी सब खुश हैं, उनके दोनों मंतरियों ने एकदम धांसू इलेक्शन वाला बजट पेश किया है, तो विपक्षी नेताओं की परेशानी ई है कि बजट का पोस्टमार्टम कर ऊ जनता को जो उसका सड़ा-गला पार्ट दिखा रहे हैं, उसको देखकर जनता को हार्ट अटैक नहीं हो रहा। एक ठो विपक्षी नेताजी मिले, बोले, 'पब्लिक निकम्मी हो गई है। लालू ने सब्जबाग दिखा...

एक एक कर सब बिक गए!

Feb 22 10:00 PM

लीजिए, सब बिक गए। का तेंडुलकर, का धोनी, का जयसूर्या, का पॉन्टिंग...सबकी औकात दो टके की हो गई। सरे बाजार सब नीलाम हो गए। कोयो शाहरुख का करमचारी बन गया, तो कोयो प्रीति जिंटा का गुलाम, कोयो विजय माल्या के बोतल में बंद हो गया, तो कोयो रिलायंस के राजस्व का हिस्सा बन गया। जो जेतना बड़ा तीसमार खां था, ओ ओतना महंगा बिका, तो सचिन के साथ 'गेम' हो गया...

जो दुनिया लूटे, महबूबा उसे लूटे

Feb 18 3:00 PM

ई गजब का रिवाज है। जो व्यक्ति दुनिया को लूटता है या फिर जिसको दुनिया नहीं लूट पाती, ऊ 'बेचारे' महबूबा के हाथों बुरी तरह लुटते हैं औरो अजीब देखिए कि लुट-लुटकर भी खुश रहते हैं। यानी महबूबा दुनिया की सबसे बड़ी लुटेरिन होती हैं या फिर आप इहो कह सकते हैं कि ऊ 'भाइयों' की 'भाई' होती हैं। इसलिए भैय्या, हम तो यही कहेंगे कि बढ़िया तो...

पहाड़ों से पलायन का दर्द

May 31 8:58 AM

नीरज जोशी पहाड़ से लौट कर आये हैं और अपना दर्द विस्फोट पर सबसे बांट रहे हैं. गांव के ईर्द गिर्द सिरहाने और पांवों की ओर दो तीन किमी दूर तक छितरे उन सीढ़ीनुमा खेतों के बारे में इस बार अचानक मेरी दिलचस्पी बढ गई। खेतों को दूर दूर तक निहारते हुए यह प्रश्न मेरे जेहन में बार-बार कौंधा कि आखिर इस महाविस्तार में इतने सीढीनुमा खेत किसने बनाये होंगे? अब ये ख...

अनुपम तालाब साधना

May 8 5:49 AM

संजय तिवारी उदारीकरण और पर्यावरण के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं.हाल ही मैं उन्होने विस्फोट पत्रिका को प्रारम्भ किया है. उसी में वह पर्यावरणविद अनुपम मिश्रा जी के बारे में बता रहे हैं. वे लोकजीवन और लोकज्ञान के साधक हैं. अब न लोकजीवन की कोई परिधि या सीमा है और न ही लोकज्ञान की. इसलिए अनुपम मिश्र भी किसी सीमा या परिचय से बंधें हुए नहीं हैं. ...

डब्बाबंद मुल्क में बड़ी होती लड़की..

Feb 29 11:06 AM

मनीषा इस पितृसत्तात्मक मुल्क में यौवन की दहलीज पर कदम रखती लड़की का शब्द चित्र खींच रही हैं.   अच्‍छे घरों की अच्‍छी लड़कियाँ विले पार्ले स्‍टेशन पर उतरते ही अच्‍छी लड़की का चोंगा सीढि़यों के नीचे छिपा कॉलेज और समंदर के सिम्‍त जाने वाली सड़क का रुख करतीं और शाम को घर लौटते हुए सीढि़यों के नीचे से चोंगा उठाती जाती...

क्या स्त्री का भविष्य अन्धकार-मय है?

Feb 24 7:06 AM

ईस्वामी पिछ्ले एक दशक से अमरीका में रह रहे हैं. वहां के समाज को वह नजदीक से देखते आये हैं और उसको लेकर उनका एक नजरिया भी है. अमरीका के नारीवादी अन्दोलन के खतरों के प्रति सतर्क करते हुए वह भारत की स्त्रीयों को अमरीकी आन्दोलन का अन्धानुकरण न करने की सलाह दे रहे हैं.     भारतीय स्त्रियों ने अपने लिये सोचने का ठेका पश्चिमी नारियों को दे द...

पुरी की यात्रा के अनुभव व धर्म

Feb 22 3:23 PM

सुनील दीपक अभी अभी भारत यात्रा से लौटे हैं.पुरी (उड़ीसा) में जगन्नाथ मंदिर की यात्रा करते समय कुछ बातें उनके मन में आयी जिन्हे वह हमारे साथ बांट रहे हैं.   वैसे व्यक्तिगत रूप में मेरे लिए धार्मिकता और मंदिर में जा कर पूजा करने में कोई विषेश सम्बंध नहीं क्योंकि मेरे लिए धार्मिकता अधिक आध्यात्मिक एवं अंतर्मुखी है. धर्म और आस्था पर बात करना मुझे...

काग़ज़ की कश्‍ती डूब गयी…

Feb 21 10:45 AM

"ये काग़ज़ की कश्‍ती वो बारिश का पानी’ लिखने वाले सुदर्शन फ़ाकिर नहीं रहे…उन्ही को श्रद्धांजली देते हुए युनुस उनकी कुछ चुनिदा नज्मों से परिचय करवा रहे हैं. सुदर्शन फाकिर जिंदगी भर गुमनाम रहे, वो उन शायरों में से नहीं थे जो टेलीविजन या रेडियो की दुनिया में छाए रहें।वो ज्‍यादा इंटरव्‍यू भी नहीं देते थे । ये विडंबन...

दिहाड़ी मजदूर

Feb 21 9:55 AM

ज्ञानदत्त पाण्डेयजी नियमित लिखने वाले हैं। उनका ब्लाग उनकी मानसिक हलचल का आईना है। वे जहां कहीं जाते हैं , उनका कैमरा उनके साथ होता है। कल ‘डिटूर’ पर निकले तो दिहाड़ी मजूर दिखे। आप भी उनकी नजर से देखिये - जहां ये लोग इकठ्ठा होते हैं, वहां रेल की संकरी पुलिया है। सड़क भी ऊबड़ खाबड़ है। लिहाजा वाहन धीरे धीरे निकलता है वहां से। सड़क के दोनो ...

क्या मैं पतित होना नहीं चाहती ?

Feb 20 7:56 PM

प्रत्यक्षा का आत्मालाप कमोबेश हर एक स्त्री और पुरुष का आत्मालाप हो सकता है.जरूरत है तो इसे अपने अंदर कुरेदने की. मैं प्रगतिशील कहलाने के लिये पश्चिमी कपड़े पहनूँ , गाड़ी चलाऊँ , सिगरेट शराब पियूँ , देर रात आवारागर्दी करूँ ऐसे स्टीरियोटाइप में नहीं फँसना चाहती । मैं ये सिर्फ तब ही करना चाहूँगी जब ये करना मेरी मर्जी में होगा , सिर्फ किसी और के बनाये ...

आम बजट की खास खास बातें

Feb 20 5:11 PM

देश का बजट एक सालाना कार्यक्रम है इसी के बारे में अपने व्यंग्यात्मक लहज़े में शिवकुमार मिश्र पूरा का पूरा निबेंध छाप दे रहे हैं. उनका यह निबंध भारतीय आम बजट की खास खास बातों से परिचय कराता है. बजट प्रस्तुति के बाद पुतले जलाने, रास्ता रोकने और बंद करने के कार्यक्रमों के अलावा एक और कार्यक्रम होता है जिसे बजट के ‘टीवीय विमर्श’ के नाम से ...

पतनशील बनाम प्रगतिशील

Feb 19 10:43 AM

चन्द्रभूषण या यानि चन्दू भाई हमेशा से ज्वलंत मुद्दों पर अपनी लेखनी चलाते रहे हैं. अब वह पतनशील और प्रगतिशील को अपने निजी अनुभव से तोल रहे हैं. जमूरे की तरह उछल-उछलकर बात-बात पर बोलने की मेरी आदत नहीं है, न ही किसी बहस में इसलिए शामिल होता हूं कि लाला लोग इस जगह पड़ी टीपें गिनें ताकि देर-सबेर दो पैसे का जुगाड़ हो। मेरे लिए कोई भी शब्द सिर्फ बौद्धि...

Source : आईना

खुश भैया और डेमोक्रेसी का ‘अमर’ जुगाड़

Aug 2 6:15 PM

“नमस्कार बड़े भैया, मैं डेमोक्रेसी का ‘अमर’ जुगाड़।”   “व्हाट जुगाड़?”   “जुगाड़ माने यदि सरकार अल्पमत में आ जाये तो हम अतिरिक्त साँसदों का जुगाड़ करवा देते हैं। यदि आपको भी कभी ट्रस्ट वोट के लिये साँसदो का जुगाड़ करना हो तो बतायें। एस पी तो क्या बीएसपी से भी जुगाड़ करवा देंगे।”   “नो नो थैंक्यू, वी डोंट आऊटसोर्स आवर डे...

एक शहर

May 29 8:13 PM

एक शहर - अमृता प्रीतम   1. अस्पताल के दरवाजे पर हक, सच, ईमान और कद्रें, जाने कितने ही लफ्ज़ बीमार पड़े हैं इक भीड़ सी इकट्ठी हो गयी है,   जाने कौन नुस्खा लिखेगा जाने यह नुस्खा लग जायेगा, लेकिन अभी तो ऐसा लगता है इनके दिन पूरे हो गये… 2. इस शहर में एक घर घर कि जहां बेघर रहते हैं जिस दिन कोई मजदूरी नहीं मिलत...

अब ट्विटर पर सीधे संदेश भेजें अपने पिटारा टूलबार से

May 28 9:12 AM

ट्विटर बहुत ही तेजी से इंटरनेट पर लोकप्रिय हो रही माइक्रोब्लॉगिंग नेटवर्किंग सेवा है। इसके द्वारा आप लगातार हर समय  अपनो मित्रों के संदेश प्राप्त भी कर सकते हैं और अपने संदेश भेज भी सकते हैं। ट्विटर के बारे में ज्यादा जानकारी आप आलोक जी के इस लेख से ले सकते हैं। यदि आपका ट्विटर पर खाता नहीं है तो आज ही बनायें और स्वंय ट्विटर की साइट पर जाकर इस...

ज्ञानवर्धक रहा दिल्ली ब्लॉगकैंप

May 25 5:16 PM

दिल्ली में ब्लॉगकैंप की घोषणा जब अमित   ने की तो उसी समय मन बना लिया था कि इस ब्लॉगकैंप में जरूर जाऊंगा। मगर शनिवार सुबह एक जरूरी मीटिंग निकल आयी। मीटिंग लम्बी हो रही थी और मेरा मन नैहरू प्लेस में माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस में चल रही ब्लॉगकैंप पर ही अटका था। किसी तरह मीटिंग समाप्त कर निकला तो ट्विटर पर अमित का संदेश था कि Blogging beyond English ...

ब्लागकैँप से मसिजीवी के साथ

May 24 12:57 PM

ब्लागकैँप से मसिजीवी के साथ बर्गर खाते हुए।

मोबाइल ब्लॉगिंग पर रिपोर्ट की रिकार्डिंग

May 8 10:57 AM

यहां पेश है पिछले शनिवार को एनडीटीवी के कार्यक्रम ग्रेट इंडियन बाजार में मोबाइल ब्लॉगिंग पर प्रसारित एक रिपोर्ट। इसे मैंने अपने मोबाइल से ही रिकार्ड किया था इसीलिये क्लिप की क्वालिटी थोड़ा अच्छी नहीं है।...

अंग्रेजी हिंदी अनुवाद पिटारा से

May 7 9:27 PM

    गूगल के हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के औजार को पिटारा में जोड़ दिया गया है। आप किसी भी साइट पर हों, एक क्लिक से उसे हिंदी से अंग्रेजी अथवा अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कर सकते हैं।   आपको बस टूल मीनू में अनुवाद पर क्लिक कर अपना ऑप्शन चुनना है।   आपने यदि किसी अनुच्छेद (पैरा) का अनुवाद करना है तो ...

एक चिट्ठी शिवजी के नाम

Aug 19 7:35 AM

परम प्रिय भाई शिवजी, अत्र कुशलम तत्रास्तु। दीगर समाचार यह है कि इधर हम छठे पे कमीशन में कित्ते पैसे मिलेंगे, कौन उधार चुकाया जायेगा, कैसे फ़िर से कंगाल हुआ जायेगा ई सब निहायत स्ट्रेटिजिक प्लान बनाने में अरझे हुये थे कि पता चला आप पर जैंटेलमेन की आफ़त आ गिरी। सुना तो ये भी की आपके [...]...

भारत एक मीटिंग प्रधान देश है

Aug 12 7:33 AM

मीटिंग [आज एक नया लेख लिखने का मन था। चिट्ठाचर्चा के चलते नहीं लिख पाया। सो मन किया पुराना ही ठेल दिया जाये। क्या हर्ज है? कुछ है क्या?] भारत एक मीटिंग प्रधान देश है.एक आवाज सहसा उछली। अनुगूंज फैल गयी दिगदिगान्तर में दस आवाजें सहसा झपट पड़ीं। आप ऐसा कैसे कह सकते [...]...

ईमानदारी गर्व का विषय नहीं है

Aug 5 7:13 AM

ईमानदारी मैं आज से करीब दो महीने पहले कानपुर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुये श्री पी.सी.द्विवेदी जी मिलने गया। वे कानपुर विश्वविद्यालय की विधि सम्बन्धी समस्यायें देखते थे। उनके पिताजी पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी प्रख्यात कांग्रेसी थे। पी.सी. द्विवेदी जी अपने पिताजी से बहुत प्रभावित थे लेकिन उनका झुकाव साम्यवाद की तरफ़ भी था। [...]...

ईमानदारी - खरीद न सको तो मैनेज कर लो

Aug 3 9:38 AM

ईमानदारी ईमानदारी आपका जीवन बनायेगी अगर आप सत्य से भयभीत नहीं हैं। तीन दिन पहले मुंशी प्रेमचंद जी का जन्मदिन था। उसी दिन सुरेशजी के ब्लाग पर प्रेमचंद जी की कहानी नमक का दारोगा का जिक्र किया गया था। नमक का दारोगा हमने बचपन में पढी थी। उसके बाद कई बार फ़िर [...]...

नोट निकले हैं तो दूर तलक जायेंगे…

Jul 26 6:31 AM

नोट एकिक नियम और समानुपात के नियम बचपन की कक्षाओं में पढ़ाये जाते हैं। अगर एक आदमी एक काम को दो दिन में करता है तो तीन आदमी मिलकर उसी काम को मिलकर कितने दिन में कर लेंगे। इसी तर्ज पर इस साल कुछ और सवाल कोर्स में शामिल होने के लिये तैयार हैं। आप मुलाहिजा [...]...

हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे

Jul 23 7:16 AM

भ्रष्ट हमारे हमारे देश की संसद तेली की वह घानी है जिसमे आधा तेल है आधा पानी है। धूमिल राजनीति की मंडी बड़ी नशीली है, इस मंडी ने सारी मदिरा पी है। रामेंन्द्र त्रिपाठी कल संसद में कुल जमा तीन सांसदों ने एक-एक करोड़ रुपये सदन के पटल पर पलट दिये। सदन शर्मसार हो गयी। शर्मसार किस लिये हुयी ये सबके [...]...

ब्लागिंग एक और चिरकुट चिंतन

Jul 19 7:21 AM

ब्लागिंग ब्लागिंग अजब-गजब चीज है। खटपटाया, बटन टबाया और आपका लिखा हो गया शाया। अब आप निहार रहे हैं चातक से। टिप्पणियों के इंतजार में। यह हमारा अपना सच है। हो सकता है आपक कुछ अलग सच हो भाया। ब्लाग की जो ताकत है वह बिना किसी बिचौलिये के दुनिया के सामने अपने को अभिव्यक्त करने के लिये [...]...

Hindi Podcasts

Sikhism, A View of the Sikh Religion

Aug 20 2:00 PM

At the northwestern tip of India is located The Golden Temple, or Harimandir Sahib, the most significant historical center on earth to the 20 million Sikhs worldwide. Here people from all walks of lif...

Sikhism, A View of the Sikh Religion

Aug 20 2:00 PM

Sikhism, A View of the Sikh Religion August 18th, 2008 At the northwestern tip of India is located The Golden Temple, or Harimandir Sahib, the most significant historical center on earth to the 20 ...

Sikhism, A View of the Sikh Religion

Aug 20 2:00 PM

At the northwestern tip of India is located The Golden Temple, or Harimandir Sahib, the most significant historical center on earth to the 20 million Sikhs worldwide. Here people from all walks of lif...

Sikhism, A View of the Sikh Religion

Aug 20 2:00 PM

At the northwestern tip of India is located The Golden Temple, or Harimandir Sahib, the most significant historical center on earth to the 20 million Sikhs worldwide. Here people from all walks of lif...

Sikhism, A View of the Sikh Religion

Aug 20 2:00 PM

At the northwestern tip of India is located The Golden Temple, or Harimandir Sahib, the most significant historical center on earth to the 20 million Sikhs worldwide. Here people from all walks of lif...

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